जीवन और संघर्ष
जीवन संघर्षों का खेल है । जो इन संघर्षों का डटकर मुकाबला करता है, वह संसार सागर से पार कर जाता है । जो संघर्षों से डर जाता है, घबरा जाता है, वह संसार सागर में भटकता रहता है ।
संघर्ष करने के साथ-साथ सावधानता भी आवश्यक है । जो सावधान नहीं रहेगा, वह परिश्रम करके भी असफल हो जाएगा । सही दिशा में और सही नियम के साथ परिश्रम करना चाहिए ।
सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि जीवन में कर्मों के प्रति निरन्तरता हो । यदि जीवन में किसी कार्य के प्रति निरन्तरता नहीं है, हडबडाहट या शीघ्रता है तो भी सफलता मिलने से रही ।
बार-बार अपने उद्देश्य बदल लेना , अदूरदर्शिता व छटपटाहट का परिचायक है । ऐसा व्यक्ति कहीं स्थिर नहीं होता । जो स्थिर नहीं हो सकता, उसकी सफलता में संदेह बना रहता है ।
स्थिरता सफलता का भी परिचायक है । बडे-बडे मनीषी स्थिर होकर ही बहुत आगे बढ गए । प्रायः करके एडीसन का नाम लिया जाता है कि उसने बल्ब का आविष्कार किया । किन्तु बहुत कम लोगों को पता होगा, कि इस सफलता के पीछे बहुत सी असफलताएँ छिपी हुई है । कई बार उसे इस कार्य में असफलता मिली । किन्तु वह कभी घबराया नहीं । लगातार कार्य में लगा रहा, बिना किसी थकावट व झिझक के ।
महान् व उत्तम लोग वही होते हैं, जो अपने कार्यों को पूर्ण करके ही दम लेते हैं । जब आपने निश्चय कर लिया कि यही कार्य सही है तो चाहे जितनी भी बाधाएँ आएँ, कार्य पूर्ण करके ही साँस लेनी चाहिए ।
संघर्ष करने के साथ-साथ सावधानता भी आवश्यक है । जो सावधान नहीं रहेगा, वह परिश्रम करके भी असफल हो जाएगा । सही दिशा में और सही नियम के साथ परिश्रम करना चाहिए ।
सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि जीवन में कर्मों के प्रति निरन्तरता हो । यदि जीवन में किसी कार्य के प्रति निरन्तरता नहीं है, हडबडाहट या शीघ्रता है तो भी सफलता मिलने से रही ।
बार-बार अपने उद्देश्य बदल लेना , अदूरदर्शिता व छटपटाहट का परिचायक है । ऐसा व्यक्ति कहीं स्थिर नहीं होता । जो स्थिर नहीं हो सकता, उसकी सफलता में संदेह बना रहता है ।
स्थिरता सफलता का भी परिचायक है । बडे-बडे मनीषी स्थिर होकर ही बहुत आगे बढ गए । प्रायः करके एडीसन का नाम लिया जाता है कि उसने बल्ब का आविष्कार किया । किन्तु बहुत कम लोगों को पता होगा, कि इस सफलता के पीछे बहुत सी असफलताएँ छिपी हुई है । कई बार उसे इस कार्य में असफलता मिली । किन्तु वह कभी घबराया नहीं । लगातार कार्य में लगा रहा, बिना किसी थकावट व झिझक के ।
महान् व उत्तम लोग वही होते हैं, जो अपने कार्यों को पूर्ण करके ही दम लेते हैं । जब आपने निश्चय कर लिया कि यही कार्य सही है तो चाहे जितनी भी बाधाएँ आएँ, कार्य पूर्ण करके ही साँस लेनी चाहिए ।

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